रपट - ४
पिछले हफ्ते रिलीस हुई 'द्रिश्यम' अजय देवगन की बेहतरीन फ़िल्मो मे से एक है, इसमे उन्होने एक आम इंसान का किरदार निभाया है, उनकी पिछली कुछ फ़िल्मो मे वे 'लार्जर दॅन लाइफ' किरदार निभाते देखे गये है, इसके उलट दृश्याम मे वे एक मध्यमवर्गीय आम आदमी विजय सालगावकर बने है जिसका एक खुशहाल परिवार है और परिवार की खुशियो मे दखल पड़ जाता है जब पोलीस की आला अफ़सर का बेटा अचानक गायब हो जाता है और इस सिलसिले मे पूरा पोलीस महकमा विजय सालगावकर के पीछे पड़ जाता है और अंत मे विजय की जीत होती है. विजय एक कम पढ़ालिखा किंतु मेहनती व्यक्ति है वह अपने परिवार के साथ पेंडुलिंम मे रहता हैं फिल्म मे अजय देवगन, तब्बू, श्रिया सरन प्रमुख भूमिकाओ मे है. तब्बू ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 'विजयपथ' से की थी जिसमे अजय देवगन हीरो थे. विजयपथ तक पहुचते अजय देवगन एक एक्शन हीरो के रूप मे स्थापित हो गये थे, आज 2015 मे वे एक आम आदमी बने है और द्रिश्यम एक थ्रिलर है इसके बावजूद वे ज़रा भी एक्शन करते नज़र नही आए है, वे जो भी करते है दिमाग़ से करते है. इस थ्रिलर मे दर्शक आख़िरी तक सीट से चिपके रहते है जबकि प्रारम्भ से ही पता होता है कि किसकीे हत्या हुई, किसने की और क्यो की. कहानी कुछ इस तरह आगे बढ़ती है की एक जुर्म हुआ है और विजय उस जुर्म को छुपाना चाहता है ताकि वो अपने परिवार को बचा सके और विजय इसमे कामयाब भी होता है पोलीस चाह कर भी सच सामने नही ला पाती. दर्शक जुर्म को छुपाने वाले विजय के साथ रहते है. निशिकांत कामत 'द्रिश्यम' के निर्देशक है और वे हिन्दी के अलावा मराठी सिनेमा मे भी सक्रिय है. 'द्रिश्यम' उनकी दूसरी बड़ी कामयाबी है इससे पहले वे 'फोर्स' नामक सफल फिल्म बना चुके है. रीमेक फ़िल्मे हमेशा से बनती रही है और आगे भी बनती रहेगी. किंतु विगत कुछ समय से सभी सुपर सितारे दक्षिण भारतीय भाषाओ मे बनी फ़िल्मो के रीमेक मे नज़र आ रहे है, 'गजिनी' और 'वांटेड' से शुरू हुआ ये सफ़र काफ़ी रोमांचक हो गया है. इधर बाहुबली ने कमाई के नये कीर्तिमान स्थापित किए है और दक्षिण भारतीय सिनिमा के लिए एक नये युग का प्रारम्भ किया है.फिल्म का संगीत औसत है किंतु इससे का बात का मलाल आपको फिल्म देखते हुए नही होगा, अतः फिल्म नगरी मुंबई को अपने सिनेमा का स्तर ऊँचा करना होगा क्यूंकी दक्षिण भारतिया फ़िल्मे लगातार विकास कर रही है और उनपे पैसा भी जमकर खर्च किया जा रहा है. बहरहाल वापस 'द्रिश्यम' पर आते है, फिल्म का संगीत औसत है किंतु इससे का बात का मलाल आपको फिल्म देखते हुए नही होगा. इस हफ्ते 'द्रिश्यम' के लिए समय ज़रूर निकाले.
पिछले हफ्ते रिलीस हुई 'द्रिश्यम' अजय देवगन की बेहतरीन फ़िल्मो मे से एक है, इसमे उन्होने एक आम इंसान का किरदार निभाया है, उनकी पिछली कुछ फ़िल्मो मे वे 'लार्जर दॅन लाइफ' किरदार निभाते देखे गये है, इसके उलट दृश्याम मे वे एक मध्यमवर्गीय आम आदमी विजय सालगावकर बने है जिसका एक खुशहाल परिवार है और परिवार की खुशियो मे दखल पड़ जाता है जब पोलीस की आला अफ़सर का बेटा अचानक गायब हो जाता है और इस सिलसिले मे पूरा पोलीस महकमा विजय सालगावकर के पीछे पड़ जाता है और अंत मे विजय की जीत होती है. विजय एक कम पढ़ालिखा किंतु मेहनती व्यक्ति है वह अपने परिवार के साथ पेंडुलिंम मे रहता हैं फिल्म मे अजय देवगन, तब्बू, श्रिया सरन प्रमुख भूमिकाओ मे है. तब्बू ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 'विजयपथ' से की थी जिसमे अजय देवगन हीरो थे. विजयपथ तक पहुचते अजय देवगन एक एक्शन हीरो के रूप मे स्थापित हो गये थे, आज 2015 मे वे एक आम आदमी बने है और द्रिश्यम एक थ्रिलर है इसके बावजूद वे ज़रा भी एक्शन करते नज़र नही आए है, वे जो भी करते है दिमाग़ से करते है. इस थ्रिलर मे दर्शक आख़िरी तक सीट से चिपके रहते है जबकि प्रारम्भ से ही पता होता है कि किसकीे हत्या हुई, किसने की और क्यो की. कहानी कुछ इस तरह आगे बढ़ती है की एक जुर्म हुआ है और विजय उस जुर्म को छुपाना चाहता है ताकि वो अपने परिवार को बचा सके और विजय इसमे कामयाब भी होता है पोलीस चाह कर भी सच सामने नही ला पाती. दर्शक जुर्म को छुपाने वाले विजय के साथ रहते है. निशिकांत कामत 'द्रिश्यम' के निर्देशक है और वे हिन्दी के अलावा मराठी सिनेमा मे भी सक्रिय है. 'द्रिश्यम' उनकी दूसरी बड़ी कामयाबी है इससे पहले वे 'फोर्स' नामक सफल फिल्म बना चुके है. रीमेक फ़िल्मे हमेशा से बनती रही है और आगे भी बनती रहेगी. किंतु विगत कुछ समय से सभी सुपर सितारे दक्षिण भारतीय भाषाओ मे बनी फ़िल्मो के रीमेक मे नज़र आ रहे है, 'गजिनी' और 'वांटेड' से शुरू हुआ ये सफ़र काफ़ी रोमांचक हो गया है. इधर बाहुबली ने कमाई के नये कीर्तिमान स्थापित किए है और दक्षिण भारतीय सिनिमा के लिए एक नये युग का प्रारम्भ किया है.फिल्म का संगीत औसत है किंतु इससे का बात का मलाल आपको फिल्म देखते हुए नही होगा, अतः फिल्म नगरी मुंबई को अपने सिनेमा का स्तर ऊँचा करना होगा क्यूंकी दक्षिण भारतिया फ़िल्मे लगातार विकास कर रही है और उनपे पैसा भी जमकर खर्च किया जा रहा है. बहरहाल वापस 'द्रिश्यम' पर आते है, फिल्म का संगीत औसत है किंतु इससे का बात का मलाल आपको फिल्म देखते हुए नही होगा. इस हफ्ते 'द्रिश्यम' के लिए समय ज़रूर निकाले.
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